विकसित भारत बनाने के लिए बड़े सुधारों की हो चुकी शुरुआत: पीएम मोदी

ऐसे समय जब कुछ दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय इकोनमी को मृत अर्थव्यवस्था करार दिया था, तब दिग्गज जापानी कंपनियों के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति को रखा।

पीएम मोदी ने भारत-जापान बिजनेस फोरम की बैठक को संबोधित किया
उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह उनकी सरकार भारत को विकसित देश बनाने के लिए बड़े सुधारों की शुरुआत कर चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार सुबह जापान पहुंचे और कुछ ही घंटों बाद जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के साथ भारत-जापान बिजनेस फोरम की बैठक को संबोधित किया।

मोदी ने जापानी कंपनियों को भारत को वैश्विक दक्षिण (विकासशील व कम विकसित) के देशों के लिए भारत को प्रवेश द्वार के तौर पर इस्तेमाल करने की पेशकश की और दोनों देशों के बीच रणनीतिक व आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने का आह्वान किया।

इस सदी की तकनीक क्रांति का नेतृत्व कर सकता है भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल के महीनों में बड़े सुधार संबंधी कदमों को गिनाया और टैक्स व्यवस्था में होने वाले संभावित बदलावों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘इन सुधारों के पीछे हमारा विकसित भारत बनाने का संकल्प है। हमारी प्रतिबद्धता है, रणनीति है।’

उन्होंने भारत की आर्थिक स्थिरता, नीतिगत पारदर्शिता और तेज विकास पर जोर देते हुए बताया, ‘अब विश्व केवल भारत को देख नहीं रहा, बल्कि भारत पर भरोसा कर रहा है।’ भारत जल्द ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है और वैश्विक विकास में 18 प्रतिशत का योगदान दे रहा है।

जापानी कंपनियों ने भारत में 40 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया
पीएम मोदी ने भारत और जापान के बीच गहरे रिश्तों को रेखांकित करते हुए कहा कि मेट्रो, विनिर्माण, सेमीकंडक्टर और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में यह साझेदारी आपसी विश्वास का प्रतीक है। जापानी कंपनियों ने भारत में 40 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है, जिसमें पिछले दो वर्षों में 13 अरब डालर का निजी निवेश शामिल है।

प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी निवेशकों के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी के अवसर सुझाए। भारत में बेहद सफल जापानी आटो कंपनियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र की सफलता को बैटरी, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, जहाज निर्माण और परमाणु ऊर्जा में दोहराया जा सकता है।

कहा, ‘साथ मिलकर हम वैश्विक दक्षिण (विकासशील व कम विकसित देशों) विशेषकर अफ्रीका के विकास में अहम योगदान दे सकते हैं। मैं आप सबसे आग्रह करता हूं कि आइए मेक इन इंडिया, मेक फार व‌र्ल्ड का फायदा उठाइए। जापान की टेक्नोलाजी और भारतीय प्रतिभा मिलकर इस सदी की तकनीक क्रांति का नेतृत्व कर सकते हैं।’

भारत और जापान की साझेदारी को रणनीतिक बताया
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारत और जापान की साझेदारी को रणनीतिक और स्मार्ट बताते हुए कहा कि यह आर्थिक तर्कों पर आधारित है और साझा हितों को समृद्धि में बदल रही है। उन्होंने जापानी प्रधानमंत्री इशिबा और बिजनेस लीडर्स का आभार व्यक्त करते हुए कहा, हम स्थिरता, विकास और समृद्धि के साथ एशियाई सदी को आकार देंगे। यह साझेदारी न केवल भारत और जापान, बल्कि पूरे विश्व के लिए समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी।’

द्विपक्षीय सहयोग के लिए पीएम मोदी के पांच सूत्र
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए पांच सूत्र गिनाए। ये हैं- मैन्युफैक्चरिंग एंड न्यू सेक्टर्स (विनिर्माण एवं नए क्षेत्र), टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन (तकनीक एवं नवाचार), ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन (हरित ऊर्जा अपनाना), नेक्स्ट-जेन इंफ्रास्ट्रक्चर (अगली पीढ़ी का बुनियादी ढांचा) और स्किल डेवलपमेंट एंड पीपुल्स-टू-पीपुल्स टाइज (कौशल विकास व लोगों के बीच संबंध)।

एआइ को-आपरेशन इनीशिएटिव की घोषणा
भारत और जापान ने शुक्रवार को एक विश्वसनीय एआई पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए बड़े भाषा माडल (एलएलएम), प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और व्यवसायों व स्टार्ट-अप के लिए सहयोग बढ़ाने के लिए एक एआइ को-आपरेशन इनीशिएटिव शुरू करने की घोषणा की। दोनों देशों ने डिजिटल साझेदारी 2.0 के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में फरवरी, 2026 में आयोजित होने वाले एआइ इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री इशिबा को आमंत्रित किया।

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