राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दिलाने सुब्रमण्यम स्वामी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने में हो रही देर पर पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब तलब किया है। स्वामी ने अपनी याचिका में कहा है कि राम सेतु लोगों की श्रद्धा और आस्था का विषय है। सरकार को इसे किसी भी प्रकार के दुरुपयोग, प्रदूषण या अनादर से बचाने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाने चाहिए।

चार हफ्ते बाद दोबारा सुनवाई होगी
याचिका में राम सेतु के भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआइ) तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) से सर्वे कराने की भी मांग की गई है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र को नोटिस जारी किया। चार हफ्ते बाद दोबारा सुनवाई होगी। अपनी याचिका में स्वामी ने शीर्ष अदालत के 19 जनवरी 2023 को पारित आदेश का हवाला दिया है।

तब केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया था कि वह राम सेतु को राष्ट्रीय विरासत स्मारक घोषित करने से संबंधित मुद्दे पर विचार कर रहा है। इस पर कोर्ट ने स्वामी की अंतरिम याचिका का निपटारा कर दिया था। स्वामी ने नई याचिका क्यों दायर की स्वामी की तरफ से नई याचिका में कहा गया है कि जनवरी 2023 के बाद से आज तक न तो उन्हें और न ही सुप्रीम कोर्ट को कोई जवाब या निर्णय के बारे में जानकारी दी गई है।

संस्कृति मंत्रालय को नया अनुरोध भेजा गया था
याचिका में कहा गया है कि यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह पुरातात्विक स्थल लोगों की आस्था और श्रद्धा का विषय है, जो राम सेतु को एक तीर्थस्थल मानते हैं। ये सभी पुरातात्विक अध्ययन और वैज्ञानिक खोजें इस मानव निर्मित स्मारक के एक तीर्थस्थल के रूप में अस्तित्व को साबित करने वाले मूल प्रमाण हैं। स्वामी ने कहा कि इस साल 13 मई को फिर से संस्कृति मंत्रालय को नया अनुरोध भेजा गया था।

क्या है राम सेतु
तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित पंबन द्वीप, जिसे रामेश्वरम भी कहा जाता है और श्रीलंका के मन्नार के बीच आपस में जुड़ी चूना पत्थरों की एक श्रृंखला है। भूगर्भशास्त्री मानते हैं कि पहले यह श्रृंखला समुद्र के ऊपर थी। इससे श्रीलंका तक चल कर जाया जा सकता था। हिंदू धर्म में इसे भगवान राम की वानर सेना का बनाया गया सेतु माना जाता है। दुनिया के कुछ दूसरे धर्मों में भी इस रचना के मानव निर्मित होने की मान्यता है। इसे एडम्स ब्रिज भी कहा जाता है।

यूपीए सरकार ने तोड़ने की बनाई थी योजना
कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार के शासनकाल में शुरू की गई सेतु समुद्रम परियोजना के तहत जहाजों को रास्ता देने के लिए राम सेतु को तोड़े की योजना थी। इस परियोजना में मन्नार और पाल्क स्ट्रेट को जोड़ने के लिए 83 किलोमीटर लंबा चैनल बनाया जाना था, जिसके लिए बड़े पैमाने पर खुदाई की जानी थी। बाद में कोर्ट के दखल के बाद यह कार्रवाई रुक गई थी। तब से राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग की जा रही है।

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